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हिमाचल के कर्ज पर सीएम सुक्खू का बड़ा बयान: बोले- भाजपा सरकार छोड़ गई 76,707 करोड़ का बोझ, 10 हजार करोड़ की देनदारियां भी थीं

सीएम सुक्खू बोले- भाजपा सरकार हिमाचल पर 76,707 करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ गई
कर्मचारियों की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां भी पिछली सरकार से मिलीं
सुक्खू ने अनुराग ठाकुर पर साधा निशाना, बोले- प्रदेश की आर्थिक स्थिति के तथ्य सामने रखें


हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पूर्व भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है। नादौन विधानसभा क्षेत्र के कांगू में रविवार को जन स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में आई और उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला, उस समय प्रदेश पर 76,707 करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके अलावा कर्मचारियों से संबंधित करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां भी पिछली सरकार छोड़कर गई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति को संभालना वर्तमान सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार द्वारा लिए गए कर्ज की किस्तों और अन्य वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए भी मौजूदा सरकार को नया कर्ज लेना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में कर्ज और वित्तीय प्रबंधन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

कर्ज की किस्त चुकाने के लिए भी लेना पड़ रहा नया कर्ज

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के समय प्रदेश पहले से ही भारी आर्थिक बोझ के नीचे था। उनके अनुसार, पिछली सरकार के कार्यकाल में लिए गए कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए वर्तमान सरकार को भी नया कर्ज लेना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश को इस वित्तीय स्थिति से बाहर निकालना है। सरकार को एक तरफ पुराने दायित्व पूरे करने हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में विकास कार्यों और जनता से जुड़े आवश्यक खर्चों को भी जारी रखना है।

मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार की वित्तीय नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि सत्ता हस्तांतरण के समय सरकार को किस तरह की वित्तीय स्थिति मिली थी।

कर्मचारियों की करीब 10 हजार करोड़ की देनदारियों का भी किया जिक्र

सीएम सुक्खू ने सिर्फ कर्ज का आंकड़ा ही नहीं बताया, बल्कि कर्मचारियों से जुड़ी देनदारियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में आने के समय कर्मचारियों की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां भी लंबित थीं।

मुख्यमंत्री के मुताबिक सरकार को पुराने वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के साथ-साथ वर्तमान प्रशासनिक और विकास संबंधी जरूरतों को भी पूरा करना पड़ रहा है। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच वित्तीय प्रबंधन सरकार के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है।

उन्होंने संकेत दिया कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सरकार को आय के साधन बढ़ाने और खर्चों को संतुलित करने की दिशा में काम करना पड़ रहा है।

अनुराग ठाकुर पर भी साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अनुराग ठाकुर केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ऐसे में उन्हें हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति और उससे जुड़े आंकड़ों की जानकारी होनी चाहिए।

सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय वास्तविक तथ्यों को जनता के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति सत्ता परिवर्तन के समय क्या थी और सरकार को किन आर्थिक दायित्वों का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब हिमाचल प्रदेश में कर्ज, वित्तीय संसाधनों और सरकारी खर्च को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है। सत्ता पक्ष जहां पूर्व सरकार के कार्यकाल में लिए गए कर्ज और लंबित देनदारियों को मुद्दा बना रहा है, वहीं विपक्ष सरकार की मौजूदा वित्तीय नीतियों पर सवाल उठाता रहा है।

कांगू में जन स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू रविवार को नादौन विधानसभा क्षेत्र के कांगू पहुंचे, जहां उन्होंने जन स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में इस तरह के स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की बात कही।

सरकार का जोर लोगों को उनके नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने और समय रहते स्वास्थ्य जांच कराने पर है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से लोगों को विभिन्न चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और आम लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

प्रदेशभर में ऐसे स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की बात

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा सुविधाओं को लोगों के करीब पहुंचाने के लिए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे शिविर आयोजित किए जाने चाहिए। इससे खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को लाभ मिल सकता है, जिन्हें सामान्य स्वास्थ्य जांच के लिए भी कई बार दूर के अस्पतालों तक जाना पड़ता है।

जन स्वास्थ्य शिविरों में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श और आवश्यक जांच की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। सरकार की ओर से ऐसे कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर आयोजित करने की दिशा में काम करने की बात कही गई है।

नेपाल में लापता ऊना निवासी का मामला भी केंद्र के समक्ष उठाया

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नेपाल में लापता ऊना निवासी के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया है।

नेपाल में लापता व्यक्ति से जुड़े मामले में परिवार की चिंता को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से केंद्र के स्तर पर आवश्यक हस्तक्षेप की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि विदेश या पड़ोसी देश में किसी हिमाचली नागरिक से जुड़ी ऐसी स्थिति में राज्य सरकार संबंधित केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई करवाने का प्रयास करेगी।

कर्ज को लेकर फिर तेज हो सकती है राजनीतिक बहस

मुख्यमंत्री के 76,707 करोड़ रुपये के कर्ज और करीब 10 हजार करोड़ रुपये की कर्मचारियों से जुड़ी देनदारियों के दावे के बाद हिमाचल में वित्तीय स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

सुक्खू ने स्पष्ट किया कि मौजूदा सरकार को विरासत में मिले वित्तीय बोझ के बीच काम करना पड़ रहा है। उनके अनुसार पुराने कर्ज की किस्तों और दायित्वों को पूरा करने के लिए नए वित्तीय संसाधन जुटाने पड़ रहे हैं।

वहीं, मुख्यमंत्री ने अनुराग ठाकुर का नाम लेकर यह भी कहा कि केंद्र में वित्त मंत्रालय से जुड़ी जिम्मेदारी संभाल चुके नेता प्रदेश की आर्थिक स्थिति से परिचित हैं। ऐसे में इस मुद्दे पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

कुल मिलाकर, कांगू में मुख्यमंत्री का बयान हिमाचल की आर्थिक स्थिति और कर्ज को लेकर सरकार की चिंता को सामने रखता है। 76,707 करोड़ रुपये के कर्ज और करीब 10 हजार करोड़ रुपये की कर्मचारियों की देनदारियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार की वित्तीय नीतियों पर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने वर्तमान सरकार के सामने पुराने दायित्वों को पूरा करते हुए विकास और जनकल्याण के काम आगे बढ़ाने की चुनौती का भी जिक्र किया।